兰戈UP News: बिजली कंपनियों ने प्राइवेट संस्था को सदस्यता व चंदे में दे दिए 1.30 करोड़, नियामक आयोग में याचिका दायर_我的网站
A | राज्य ब्यूरो, लखनऊ। घाटे में चल रहीं प्रदेश की बिजली कंपनियों ने प्राइवेट संस्था आल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन को सदस्यता और चंदे के रूप में 1.30 करोड़ से अधिक दिए हैं। सदस्यता व चंदे की सूचना मिलने के बाद बुधवार को बिजलीकर्मियों के संगठनों और उपभोक्ता परिषद ने उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन प्रबंधन को कटघरे में खड़ा किया। विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सरकारी बिजली कंपनियों द्वारा निजी संस्था को सदस्यता और चंदे के रूप में इतनी बड़ी धनराशि दिए जाने पर विद्युत नियामक आयोग में याचिका दायर कर प्रकरण की जांच कराने की मांग की है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग में दायर याचिका में कहा है कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल इस प्राइवेट संस्था के महासचिव हैं। उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया है। पावर कारपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष व ऊर्जा सचिव रह चुके आलोक कुमार इस संस्था के महानिदेशक हैं। लिखा है कि प्रदेश के उपभोक्ताओं से वसूली जा रही बिजली बिल की धनराशि से किसी प्राइवेट संस्था को करोड़ों रुपये चंदा देना असंवैधानिक है। इस मामले की सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए।,याचिका के माध्यम से आयोग को बताया है कि तीन जून को पावर कारपोरेशन के साथ ही पांचों विद्युत वितरण कंपनियों ने इस संस्था को सदस्यता व चंदे के रूप में 1,30,80000 रुपये दिए। सभी बिजली कंपनियों ने अलग-अलग 21.80 लाख रुपये संस्था को दिए हैं। यह भुगतान उपभोक्ताओं से वसूले गए राजस्व में से किया गया है।भुगतान करने के लिए नियामक आयोग से कोई अनुमति नहीं ली गई है। सवाल खड़ा किया है कि सरकारी क्षेत्र की बिजली कंपनियां किसी प्राइवेट संस्था को सरकारी राजस्व से चंदा कैसे दे सकती हैं। आयोग से मांग की है कि इस खर्च का भार प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं पर ना पड़े, जो भी जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। ,इस मामले में पावर कारपोरेशन अध्यक्ष से स्पष्टीकरण भी लिया जाए। वहीं इस प्रकरण पर पूछे जाने पर पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कुछ भी बोलने से इनकार किया। सीएम से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के गठन से लेकर पावर कारपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों द्वारा एसोसिएशन को चंदा दिए जाने के मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। ,हितों के टकराव को देखते हुए पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल को निर्देश दिया जाए कि वे डिस्कॉम एसोसिएशन महामंत्री का पद छोड़ दें नहीं तो उन्हें पावर कारपोरेशन अध्यक्ष के पद से हटाया जाए। समिति ने बताया है कि पावर कारपोरेशन ने एसोसिएशन की सदस्यता के लिए जीएसटी मिलाकर 11.80 लाख रुपये का भुगतान किया है। सहयोग (चंदे) के रूप में 10 लाख रुपये का भुगतान अलग से किया है।。 对打工人来说,一天里真正属于自己的时间,往往是从"不用动脑子"的那一刻开始的。晚高峰的地铁上、临睡前的沙发里,人只想彻底松下来,什么都不想。可真让人闲着什么都不干,又坐不住,能让人真正放松的,往往是在放松的同时,手上有点事做。像我,就很喜欢撸猫和收拾东西。回家之后,摸摸蹭过来的猫,听它喉咙里咕噜咕噜,又或是强迫症发作,把房间里的各种东西归置得井井有条。不管之前有多烦躁,弄着弄着,心里那股烦躁居然自己平下去了。后来我想明白了,不管是整理还是撸猫,这种沉浸其中的过程才是最解压的。可这两件事通常得分头去做,猫在猫窝里,要收纳的东西遍布整个房间。那有没有一款游戏,能做到“我全都要”?《猫咪又把药水打翻了!》便是这么一款作品。>>>点击跳转Steam商店页这款游戏的剧情其实已经在名字里交代了。调皮捣蛋的猫咪们,把女巫工坊里的近两千瓶药水全都扫到了地上。你作为刚报到的新学徒,上岗第一天就撞见这一地狼藉,唯一能做的事,就是把它们按照正确的顺序,一瓶一瓶放回货架。
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C | 从看不懂药水的排列规律,到猫咪直接把答案喂到嘴边,当我玩得越深入,我的心态也就越发轻松。随着技能的成长,中后期解谜的负担被一点点卸掉,游戏的重心从"推理"慢慢滑向"享受"。你要做的,只是把药水一瓶瓶归位,看着货架从混乱走向秩序,享受把一块块拼图按下去的快感。
D | 所以,别看开篇一地药水像是个烂摊子,这款游戏其实越玩越简单。只要拿到一瓶药水,找到其他药水的路径就几乎不费吹灰之力,剩下的,全是整理本身带来的治愈。说到底,《猫咪又把药水打翻了!》能让人放松,是因为它把现实里永远收拾不完的摊子,在游戏里变成了一件能收拾完的事。如果你对把东西收纳整齐有执念,如果你在碎片时间里只想找个不赶时间、不惩罚失败的角落待着,如果你恰好也喜欢猫,那这款游戏就几乎是为你准备的。不用急着通关,也不用跟谁比进度,打开游戏,把药水一瓶一瓶归位,偶尔停下来撸两下那些猫,给自己的心情放个假,这就足够了。游戏将于明天正式发售,售价24元,并将以9折的首发折扣持续两周。
E | 如果你也对游戏感兴趣,那么可以点此可前往>>>Steam商店页,尝试一番边收纳边撸猫的新奇体验。本文由游民星空制作发布,未经允许禁止转载。
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